गांवों का विकास, किसानों की खुशहाली और हरदा को देश एवं प्रदेश में हर क्षेत्र में नंबर वन बनाना ही कमल पटेल का है संकल्प
*गांवों के विकास में किसान नेता कमल पटेल, कृषि के क्षेत्र में मुख्य रूप से किसने की खुशहाली सहित क्षेत्र का विकास, नहरो का जाल, सड़कों का जाल, हर घर जल, बिजली, सड़क ,पानी, स्कूल, कॉलेज, स्वास्थ्य केंद्र, अन्य प्रकार के मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने का लक्ष्य बनाया और सफल रूप से क्षेत्र की जनता को सुविधा का लाभ दिलाया यही सेवा संकल्प को अपना कर्तव्य मानते हैं
हरदा /- जिले के छोटे से गांव राततलाई में जन्मे कमल पटेल जी ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुडक़र राजनीति शुरू की, गांव की बदहाली देखकर कुछ नया करने की ठानी और सीधे विधायक का चुनाव लडक़र जीते, प्रदेश के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री एवं कैबिनेट मंत्री के रूप में राजस्व एवं कृषि मंत्री रहते जनता तथा किसानों के हित में कामों से हरदा का नाम देश-प्रदेश में किया है गौरान्वित**हरदा।* प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं हरदा-खिरकिया विधानसभा क्षेत्र की जनता के लाड़ले नेता कमल पटेल जी का राजनीति में प्रवेश करने के पीछे का संकल्प गांवों की दशा में दिशा बदलना रहा। जिले के छोटे से गांव रातातलाई के पटेल (डूडी) परिवार में 6 अक्टूबर 1961 को वरिष्ठ कृषक एवं समाजसेवी हरनाथ डूडी जी एवं पार्वती बाई डूडी जी के बड़े बेटे कमल पटेल जी का नाम आज देश एवं प्रदेश में हरदा जिले की पहचान बना हुआ है। कमल पटेल जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव की स्कूल में प्राप्त की। इसके बाद वे पांचवीं तक अबगांवकलां स्कूल में पढ़े। इसके बाद हरदा की स्कूल में पढ़ाई की। कॉलेज की पढ़ाई करने परिवार ने उन्हें इंदौर भेजा। परंतु गांव की बदहाल स्थिति को देखकर कमल पटेल जी ने अपने एवं क्षेत्र के गांवों के लिए कुछ नया करना का ठाना। इसलिए राजनीति में प्रवेश का मन बनाया। जबकि परिवार के लोग उन्हें खेलों में बढ़ावा दे रहे थे। लेकिन गांवों की दशा एवं दिशा बदलने की ललक ने उन्हें राजनीति में प्रवेश कराया। हालांकि इंदौर में बीकॉल एवं एलएलबी की पढ़ाई के दौरान उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से छात्र राजनीति की शुरूआत कर दी थीं। किंतु क्षेत्र के लिए कुछ नया करने की ठानते हुए उन्होंने 1993 में विधानसभा चुनाव हरदा विधानसभा से लड़ा और जनता के आशीर्वाद से जीतकर विधानसभा पहुंचे। कमल पटेल जी ने गांवों को वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बनाने की शुरुआत हरदा जिले से की थी। ताकि गांव के ऐसे पढ़े-लिखे बेरोजगार युवा, जिन्हें नौकरी नहीं मिलती और जो केवल खेती पर निर्भर रहते हैं, वे अब अपना व्यवसाय और उद्योग शुरू कर सकेंगे। वे खाद-बीज की दुकान, कृषि दवाईयों की दुकान या अन्य छोटे व्यवसाय खोल सकेंगे। पहले गांव में जमीन का मालिकाना हक नहीं होने के कारण बैंक से ऋण और व्यवसाय के लिए लिमिट मिलना मुश्किल था। अब गांव के लोगों को भी शहर के व्यापारियों की तरह बैंक से वित्तीय सुविधाएं मिल सकती है। कमल पटेल जी का मानाना था कि जब गांव की संपत्ति का मूल्य बढ़ेगा और लोगों को मालिकाना हक मिलेगा, तो गांवों में उद्योग स्थापित होंगे। स्थानीय स्तर पर कच्चा माल उपलब्ध होगा और युवाओं को रोजगार मिलेगा। जो युवा नौकरी की तलाश में भटकते थे, वे स्वयं उद्यमी बन सकेंगे। इससे बेरोजगारी कम होगी, पलायन रुकेगा और गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।मैदा मिल, ऑयल मिल, दाल मिल और कृषि उपकरणों से जुड़े उद्योग गांवों में स्थापित हो सकते हैं। बैंक वित्तपोषण और सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलने से ग्रामीण युवा आगे बढ़ सकेंगे। गांव मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा और गांव विकसित होगा तो राष्ट्र विकसित होगा। यह परिवर्तन केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन का उदाहरण है। एक किसान का बेटा गांव की इन समस्याओं को बेहतर समझ सकता है। मीडिया से एक इंटरव्यू में कमल पटेल जी ने कहा भी है कि जब मैं राजनीति में आया था, तभी मैंने संकल्प लिया था कि गांवों के लोगों को भी वही आर्थिक अधिकार मिलने चाहिए जो शहरों में रहने वाले लोगों को प्राप्त हैं। मुझे स्वयं शहर में मकान होने के बावजूद यह महसूस हुआ कि गांव के दूसरे किसान क्या करेंगे? इसी सोच के साथ मैंने संकल्प लिया कि सत्ता में आने पर गांव की आबादी भूमि पर मालिकाना हक दिलाने के लिए कानून और व्यवस्था बनवाऊंगा। इसी दिशा में हरदा से पहल की गई, जो आगे चलकर स्वामित्व योजना जैसी बड़ी पहल का आधार बनी।*हरदा को हर क्षेत्र में नंबर वन बनाने का लक्ष्य*प्रदेश में कांग्रेस की सरकार में हरदा को होशंगाबाद से अलग करके जिला बनाने से दिग्गी राजा ने इंकार कर दिया। परंतु कमल पटेल जी जो संकल्प लेते हैं उसे पूरा भी करते हैं। उन्हों दिग्विजय सिंह की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विधानसभा में लगातार मुद्दा उठाया एवं हरदा में जनता के सहयोग से आंदोलन भी किए। जिसका नतीजा है कि आज हरदा जिला है। कमल पटेल जी कहते हैं कि हरदा को जिला बनाने के बाद हमारा अगला लक्ष्य था कि हर क्षेत्र में हरदा को नंबर वन बनाया जाए। हमने नारा दिया था हर-हर नर्मदे, नर्मदे हर, जिंदगी भर, खेत-खेत में नर्मदे और गांव-गांव नर्मदे। आज हरदा शहर और खिरकिया में नर्मदा का पानी घर-घर पहुंचाने की दिशा में काम हुआ है। इसके साथ ही हरदा जिले के 458 गांवों के लिए पेयजल योजनाएं स्वीकृत कराने का प्रयास किया गया, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य पूरा हो सके। *हरदा मंडी को मॉडल मंडी बनाने का प्रयास*प्रदेश की सरकार में कृषि मंत्री रहते कमल पटेल जी ने हरदा कृषि उपज मंडी को मॉडल मंडी के रूप में विकसित करने का काम किया। आज मंडी में किसानों और व्यापारियों की सुविधाओं के लिए कई व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं।मंडी में ऑडिटोरियम, कार्यालय, किसानों के लिए वातानुकूलित विश्राम गृह, हम्मालों के लिए कैंटिन, व्यापारियों के लिए शेड और इलेक्ट्रॉनिक कांटों जैसी सुविधाएं विकसित की गईं। इसका उद्देश्य था कि किसानों की उपज सुरक्षित रहे, उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलें और मंडी का संचालन व्यवस्थित ढंग से हो।*22 पुल और 102 सडक़ों से बदली क्षेत्र की तस्वीर*कृषि मंत्री रहते हुए कमल पटेल जी ने मुख्यमंत्री के सहयोग से हरदा जिले में 102 सडक़ों और 22 पुलों के निर्माण की दिशा में काम कराया गया। इन निर्माण कार्यों से जिले के कई गांवों का संपर्क बेहतर हुआ। गांवों को जोडऩे के लिए सडक़ें और पुल बनने से आवागमन आसान हुआ और किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में सुविधा मिली। वहीं सडक़ें बनने से किसानों की जमीनों का मूल्य भी बढ़ा। पहले जिन गांवों तक पहुंचने में कठिनाई होती थी, वहां अब बेहतर सडक़ संपर्क उपलब्ध हुआ है। एक गांव के एक किसान ने एक कार्यक्रम में खुद कमल पटेल जी को बताया कि सडक़ नहीं होने के कारण उसकी जमीन का सौदा पहले रद्द हो गया था। बाद में सडक़ बनने के बाद जमीन का मूल्य काफी बढ़ गया। वक्ता के अनुसार, इससे यह स्पष्ट होता है कि सडक़ केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण संपत्ति और अर्थव्यवस्था के विकास का माध्यम भी है। गांवों में सडक़ें और बायपास बनाने का काम कमल पटेल ने कराया है। उनका हमेशा प्रयास रहा कि जो भी घोषणा की जाए, उसे पूरा करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए।*जिले की बिजली व्यवस्था में सुधार*कमल पटेल जी के विधायक बनने से पहले हरदा, टिमरनी, खिरकिया और सिराली सहित कई क्षेत्रों में बिजली की स्थिति खराब थी। किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिलती थी। कई बार बिजली के तार तो होते थे, लेकिन पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलता था। किसान डीजल जनरेटर पर निर्भर रहते थे, जिससे खेती की लागत बढ़ जाती थी।इस समस्या को दूर करने के लिए कमल पटेल जी ने 132 केवी के बिजली उपकेंद्रों और अन्य विद्युत अधोसंरचना के विकास पर काम किया गया। खिरकिया, छीपाबड़, हरदा, सोडलपुर और टेमागांव सहित विभिन्न स्थानों पर बिजली व्यवस्था मजबूत करने की पहल की गई। इसके अलावा 33/11 केवी के अनेक उपकेंद्र स्थापित किए गए। इससे गांवों और खेतों तक बिजली पहुंचाने तथा किसानों को बेहतर वोल्टेज उपलब्ध कराने में मदद मिली। एक वक्ता के अनुसार, किसानों को खेती के लिए प्रतिदिन लगभग 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया गया। कई गरीब, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवारों को सरकारी प्रावधानों के बावजूद खेतों तक बिजली पहुंचाने में कठिनाई होती थी। बिजली के खंभे और तार नहीं होने के कारण उन्हें स्थायी कनेक्शन नहीं मिल पाता था और अस्थायी व्यवस्था पर खर्च करना पड़ता था। इस समस्या को दूर करने के लिए कमल पटेल जी ने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व फंड से लगभग ढाई करोड़ रुपये की राशि जुटाकर बिजली संबंधी कार्य कराने की पहल की गई। इससे गरीब परिवारों और खेतों तक बिजली की सुविधा पहुंची।*महिला स्व-सहायता समूहों को ट्रैक्टर*महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कृषि विभाग के माध्यम से कमल पटेल जी ने कृषि मंत्री रहते एक नई पहल की। इसके तहत आदिवासी और अनुसूचित जाति की महिला स्व-सहायता समूहों को ट्रैक्टर उपलब्ध कराने की योजना शुरू की गई। जिले के 17 महिला समूहों को लगभग 80 प्रतिशत सब्सिडी पर ट्रैक्टर दिए गए। समूहों को निर्धारित अंशदान जमा करके ट्रैक्टर और कृषि उपकरण उपलब्ध कराए गए, जिन्हें किराये पर चलाकर महिलाओं ने आमदनी में बढ़ोत्तरी की। कमल पटेल जी का इस पहल के पीछे उद्देश्य महिलाओं को रोजगार देना, उनकी आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना था।*सिंचाई के क्षेत्र में हरदा को आगे बढ़ाने का प्रयास*हरदा जिले को सिंचाई में मध्यप्रदेश में नंबर बनाने की तहलीज पर लाकर प्रदेश के पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल ने खड़ा किया है। उन्होंने किसानों के हित में जिले में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए माचक नहर, खेड़ा नहर और अन्य सिंचाई परियोजनाओं पर काम किया गया। रेलवे लाइन के पार तक सिंचाई सुविधाएं पहुंचाने के साथ हंडिया सहित अन्य क्षेत्रों में जल संरचनाओं का व्सितार किया गया। इसके बाद शहीद ईलाप सिंह योजना के माध्यम से लगभग एक लाख एकड़ भूमि को पाइपलाइन से सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया। इस योजना में भूमिगत पाइपलाइन का विचार इसलिए अपनाया गया, ताकि नहरों के लिए जमीन खोदने से छोटे किसानों की खेती योग्य भूमि कम न हो। योजना के अनुसार, किसानों को पाइपलाइन और बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकारी सहायता का प्रावधान रखा गया। इससे छोटे और मध्यम किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। कमल पटेल जी के प्रयासों से ही शहीद दीपसिंह चौहान के नाम से भी एक अन्य योजना लागू हुई। जिसके माध्यम से नहरों के अंतिम छोर यानी टेल एरिया तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाने की योजना है। वहीं गंजाल-मोरण परियोजना का काम निरंतर जारी है। जिससे किसानों के खेतों तक सिंचाई का भरपूर पानी पहुंचेगा।*शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव*कमल पटेल जी ने हरदा क्षेत्र के विधायक एवं प्रदेश के कैबिनेट मंत्री रहते शिक्षा के क्षेत्र में भी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया। जहां कभी गांवों में स्कूलों की इमारतें जर्जर थीं, वहां नई इमारतें बनवाने और शैक्षणिक सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया। जिन क्षेत्रों में केवल प्राथमिक विद्यालय थे, वहां माध्यमिक विद्यालय खोलने; जहां माध्यमिक विद्यालय थे, वहां हाई स्कूल और जहां हाई स्कूल थे, वहां हायर सेकेंडरी स्कूल की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया गया। हरदा विधानसभा क्षेत्र में अबगांवकलां और खिरकिया में दो सीएम राइज (सांदीपनी स्कूल) ी व्यवस्था की गई, जबकि अन्य क्षेत्रों में एक-एक स्कूल भी बच्चों को अच्छी शिक्षा सरकारी स्कूलों में देने के उद्देश्य से खुलवाएं। इन स्कूलों में आसपास के लगभग 20 किलोमीटर के क्षेत्र से बच्चों को बस सुविधा के माध्यम से लाने और नि:शुल्क शिक्षा बच्चों को वर्तमान में मिल रही है। इन विद्यालयों में बेहतर शिक्षक, प्रयोगशालाएं और खेल मैदान जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया, ताकि गरीब परिवारों के बच्चे भी डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस और आईपीएस बनने का सपना पूरा कर सकें।*केन्द्रीय विद्यालय, कॉलेज और लॉ कॉलेज*प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री कमल पटेल जी ने हरदा जिले में शिक्षा के अवसर बढ़ाने के लिए केन्द्रीय विद्यालय, मॉडल स्कूल, कॉलेज और लॉ कॉलेज जैसी संस्थाओं को क्षेत्र में लाने के सफल प्रयास किए। अबगांवकलां में केंद्रीय विद्यालय, मॉडल स्कूल, कॉलेज और लॉ कॉलेज की सुविधाओं का उल्लेख किया गया। खिरकिया में सरकारी कॉलेज की सौगात कृषि मंत्री रहते कमल पटेल जी ने प्रदान की। जबकि कमलनाथ की कांगे्रस सरकार में उनके उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने खिरकिया में कॉलेज की आवश्यकता नहीं है विधानसभा में कमल पटेल जी के सवाल के जवाब में कह कथन कहे थे। किंतु क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की सुविधा देने कमल पटेल जी ने कैबिनेट मंत्री रहते यह सुविधा खिरकिया को प्रदान की और कॉलेज को शुरू कराया। कॉलेज के लिए नए भवन का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। इन प्रयासों का उद्देश्य यह है कि ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर शहरों में न जाना पड़े और उन्हें अपने क्षेत्र में ही बेहतर शैक्षणिक अवसर मिल सकें।*विकास कार्य कराना ही है संकल्प*हरदा के विकास को लेकर हमारा प्रयास रहा है कि सडक़, बिजली, सिंचाई, पेयजल, शिक्षा, कृषि और रोजगार जैसे क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए। कमल पटेल जी का हमेशा यह मानना रहा है कि विकास केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले कामों से होता है। जहां सडक़ नहीं हैं, वहां सडक़ बननी चाहिए; जहां बिजली नहीं है, वहां बिजली पहुंचनी चाहिए; जहां पानी नहीं है, वहां पेयजल और सिंचाई की व्यवस्था होनी चाहिए; और जहां शिक्षा की सुविधा नहीं है, वहां अच्छे विद्यालय और कॉलेज स्थापित होने चाहिए।गांवों को मजबूत बनाना, किसानों की आय बढ़ाना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना ही हरदा को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना ही उनका लक्ष्य रहा है।*कमल पटेल जी का संक्षिप्त जीवन परिचय*कमल पटेल जी वर्ष 1993 में पहली बार हरदा विधानसभा क्षेत्र से विधायक का चुनाव जीते। इसके बाद वे 1998, 2003 और 2008 में भी हरदा से विधायक निर्वाचित हुए। फिर 2018 में उन्होंने फिर हरदा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। वर्ष 2005 में कमल पटेल जी मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री बने। फिर बाद में उन्होंने राजस्व, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा पुनर्वास जैसे विभागों की जिम्मेदारी भी संभाली। वर्ष 2020 में शिवराज सिंह चौहान जी की सरकार में उन्हें किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया। कमल पटेल जी की राजनीति में कृषि, किसान और हरदा क्षेत्र का विकास प्रमुख केन्द्र बिंदू हैं।*प्रदेश में ऐतिहासिक उपलब्धि – स्वामित्व योजना*कमल पटेल जी के अथक प्रयासों से हरदा जिला देश का पहला जिला बना, जहां प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना का शत-प्रतिशत ड्रोन सर्वे पूरा हुआ। इसके तहत जिले के सभी आबाद गांवों में ड्रोन से जमीनों का डिजिटल सर्वेक्षण करवाकर ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक (प्रॉपर्टी कार्ड) दिया गया। इससे ग्रामीण अब अपनी संपत्ति पर बैंक से लोन ले सकते हैं, जमीन के विवाद खत्म हुए और गांवों में विकास कार्यों की प्लानिंग आसान हुई। यह उपलब्धि आज पूरे देश के लिए मॉडल बन गई है, जिसकी सराहना खुद प्रधानमंत्री जी ने की थी। किसी स्वामित्व योजना के तहत पिछले दिनों इंदौर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जी ने मालिकाना हक के पट्टों का वितरण हितग्राहियों में कर दिया है।*कमल पटेल जी के जनता दरबार में लोगों की समस्याओं का तत्काल होता है समाधान*कमल पटेल जी की सबसे बड़ी ताकत उनकी लोकप्रियता है। 2023 का चुनाव हारने के बाद भी वे एक दिन भी घर नहीं बैठे।आज भी चाहे बरंगा फार्म हाउस हो या हरदा कार्यालय, जहां भी वे मौजूद रहते हैं, वहां सुबह से ही जनता का समूह उमड़ पड़ता है। वे जनता दरबार लगाकर आम लोगों की समस्याएं सुनते हैं और वहीं से अधिकारियों को फोन लगाकर तुरंत समाधान करवाते हैं। सड़क, बिजली, पानी, राजस्व, पुलिस का कोई भी काम हो, लोग सीधे कमल पटेल जी के पास आते हैं और उनका काम होता है।इसीलिए लोग कहते हैं – “पद रहे न रहे, हरदा का असली जनसेवक तो कमल पटेल ही है।







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